Ras in Hindi – काव्य की आत्मा और भावनाओं का प्रतीक

Ras in Hindi

आचार्य भरतमुनि ने काव्यशास्त्र में रस का महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उन्होंने कहा, “रसो ह्येवायं लब्ध्वानं नानाभावान् कुरुते नरः।” इसका अर्थ है कि काव्य के माध्यम से व्यक्ति भिन्न-भिन्न भावनाओं को अनुभव करके उनके अंतर्गत रस को जागरूक करता है। यह रस ही काव्य की आत्मा होता है, जो व्यक्ति के मन और ह्रदय में … Read more

Veer Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit

Veer Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit

Veer Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit: वीर रस, हिंदी भाषा के व्याकरण का विशेष भाग नहीं है। वीर रस भारतीय काव्यशास्त्र में एक भावना (ras) का नाम है जिसे काव्य या साहित्य में वीरता, उत्साह, और साहस की भावना को प्रकट करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। व्याकरण और रस दो विभिन्न विषय हैं। … Read more