Ras in Hindi – काव्य की आत्मा और भावनाओं का प्रतीक

Ras in Hindi

आचार्य भरतमुनि ने काव्यशास्त्र में रस का महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उन्होंने कहा, “रसो ह्येवायं लब्ध्वानं नानाभावान् कुरुते नरः।” इसका अर्थ है कि काव्य के माध्यम से व्यक्ति भिन्न-भिन्न भावनाओं को अनुभव करके उनके अंतर्गत रस को जागरूक करता है। यह रस ही काव्य की आत्मा होता है, जो व्यक्ति के मन और ह्रदय में … Read more